मोटी मोटी आँख यों सुरमा लागे सै घणा जहरी
घेटी मै को पाणी दिखे कसर एक ही रह री
बलम जी घड़वा दो गल का हार
कालजे कै ला लुंगी तू सुण भरतार
कुछ भी लाकै देवै नहीं बस मारै बात गिरकाणे
अठाइस इंची कमर देवे सै बैरण रोज उल्हाणे
बलम करवा दे तागड़ी त्यार
गोदी मै तने ठा लुंगी तू सुण भरतार
चांदी की पायल खूगी मै काल गई थी मेले मै
मै ढूंढ ढूंढ कै होइ पसीने ना पाई उस रेले मै
पायल मेरी घड़वा दे बुलाके सुनार
अनिरुद्ध तालु फेर तू सुण झंकार