Der Holi Aaber Holi - Narendra Sinh Negi/Anuradha Nirala
Written by:Benni Satmakker/Narendra Sinh Negi
देर होली अबेर होली
देर होली अबेर होली
होली जरुर सबेर होली
होली जरुर सबेर होली
हिटदी जा हिटदी जाच
देर होली अबेर होली
देर होली अबेर होली
होली जरुर सबेर होली
होली जरुर सबेर होली
हिटदी जा हिटदी जा हिटदी जाहो ओ ओ
बटवे रे हिटदी जाच
बटवे रे हिटदी जाच
मुख फेर फेरी फेरी अंधेरु नि छटेणू
बाठु हेरी हेरी बाठु नि कटेणू
हिटदी जा हिटदी जा
मुख फेर फेरी फेरी अंधेरु नि छटेणू
बाठु हेरी हेरी बाठु नि कटेणू
कैमा क्या पुछदी बैठी क्या सोचदी
कैमा क्या पुछदी बैठी क्या सोचदी
पैली भी व्हे फेर होली
होली जरुर सबेर होली
हिटदी जा हिटदी जा हिटदी जाहो ओ ओ
बटवे रे हिटदी जा च
बटवे रे हिटदी जा च
खैरी बिपदा का बिष कांडा काटी
अंधेरु बिरै कि सुबठा छांटी
हिटदी जा हिटदी जा च
खैरी बिपदा का बिष कांडा काटी
अंधेरु बिरै कि सुबठा छांटी
मारी लपाक लन्गै कि बुरैइ
मारी लपाक लन्गै कि बुरैइ
सोच भलु भलु कैर होली
होली जरुर सबेर होली
हिटदी जा हिटदी जा हिटदी जाहो ओ ओ
बटवे रे हिटदी जाच
बटवे रे हिटदी जाच
रात भी आली रत्ब्याणु हैसलू अँधेरा मन उज्येलु पौन्छालू
हिटदी जा हिटदी जा च
रात भी आली रत्ब्याणु हैसलू अँधेरा मन उज्येलु पौन्छालू
कांडों मा फूल डान्डों मा हैर्याली
कांडों मा फूल डान्डों मा हैर्याली
दुनिया देखली जैबेर होली
होली जरुर सबेर होली
हिटदी जा हिटदी जा हिटदी जाहो ओ ओ
बटवे रे हिटदी जाच
बटवे रे हिटदी जाच
होलू उदंकार जब धार पोर खुलला सुख का द्वार मोर
हिटदी जा हिटदी जा च
होलू उदंकार जब धार पोर खुलला सुख का द्वार मोर
भैराली दीजी व भाग कि बांद
भैराली दीजी व भाग कि बांद
देली मा पौन्छ्दी भेंट होली
होली जरुर सबेर होलीच
हिटदी जा हिटदी जा हिटदी जाहो ओ ओ
बटवे रे हिटदी जाच
बटवे रे हिटदी जाच
बटवे रे हिटदी जाच