रात के दो बजे, कमरे में बस मैं और मेरी तन्हाई,
सवाल लाखों हैं ज़हन में, पर जवाब की ना सुनवाई।
ये कैसी दौड़ है जहाँ सब भाग रहे, पर मंज़िल गुम है,
चेहरे पे हँसी है मगर, दिल में एक अनकहा सा ग़म है।
हर रिश्ता यहाँ लिफाफा है, जिस पर लिखा कुछ और है,
अंदर झाँको तो, मतलब की दुनिया का बस ज़ोर है।
खो गया बचपन, वो सादगी और वो मासूमियत,
अब तो बस क़र्ज़ है, ख्वाहिशों का और जिम्मेदारियों की ज़ीनत।
क्या यही ज़िंदगी है? बस गिनती साँसों की,
या कुछ और भी है, इस मिट्टी के लिबासों की?
ये ज़िंदगी है, एक गहरा समुंदर, जिसमें तू तैर रहा है,
दर्द की लहरें हैं, जो तुझे रोज़ घेरे जा रही हैं।
तू रोता है चुपके से, ये दुनिया कहाँ जानती है?
बस हिम्मत रख, ये सफर तेरा है, ये दिल की कहानी मानती है।
हर ज़ख्म एक सबक़ है, हर आँसू एक कहानी,
ये ज़िंदगी है, जो तुझे हर पल, दे रही है कुर्बानी।
आईने में देखता हूँ, तो खुद को पहचानता नहीं,
वो पुरानी आग, वो जुनून अब क्यूँ मानता नहीं?
डर है कि कहीं भीड़ में अपना वजूद ना खो दूँ,
नकली मुस्कानों के पीछे, अपनी रूह को ना रो दूँ।
हम सब खिलाड़ी हैं, एक अजीब से खेल के मैदान के,
जहाँ प्यार भी सौदा है, और रिश्ते बस नाम के।
दुआ है ये दिल से, कि बस सच्चा रहूँ अपने आप से,
ना भागूं मैं शैतान से, ना डरूं मैं किसी श्राप से।
किसको दिखाऊँ ये टूटे हुए ख्वाबों का अंबार?
अंदर ही अंदर घुटता हूँ, ये कैसा है संसार?
जीना है तो सच्चाई से जी, दिखावे का क्या मोल,
जब जाना है अकेले, तो क्यूँ दुनिया के लिए डोल?
ये ज़िंदगी है, एक गहरा समुंदर, जिसमें तू तैर रहा है,
दर्द की लहरें हैं, जो तुझे रोज़ घेरे जा रही हैं।
तू रोता है चुपके से, ये दुनिया कहाँ जानती है?
बस हिम्मत रख, ये सफर तेरा है, ये दिल की कहानी मानती है।
हर ज़ख्म एक सबक़ है, हर आँसू एक कहानी,
ये ज़िंदगी है, जो तुझे हर पल, दे रही है कुर्बानी।
क्यूँ ना मनीष हम ठहरें, साँस लें, और पूछे खुद से सवाल?
क्या यही खुशी है, जिसकी हमें थी हमेशा मलाल?
शायद ज़िंदगी का मतलब, बस जीना नहीं, महसूस करना है,
छोटे पलों में शांति ढूँढना, और थोड़ा-सा हँसना है।
ये धूप और छाँव का खेल है, ये आएगा और जाएगा,
अंधेरे के बाद, रोशनी का सूरज ज़रूर आएगा।
बस इंतज़ार कर...
दिल की बात सुन...
ज़िंदगी... तेरी है।