Beyond the Seven Seas
作词:飞马流星
作曲:飞马流星
演唱:飞马流星
मैंने छोड़ दिया अपना घर-आँगन
खोजने निकला तुझे सात समुंदर पार
पैरों में लगी रेत अनजान तटों की
आँखों में बसा तेरा ही ख़्वाब सितारों भरा
पहला समुंदर था भय का, गहरा और काला
जहाँ डूबते थे सब साहस के जहाज़
पर मैं तैरता रहा तेरे नाम की डोंगी पर
हर लहर से कहता — “वह मिलेगी, वह मिलेगी”
दूसरा समुंदर था विस्मृति का, धुँधला-सा
जहाँ खो जाते थे सब यादों के रास्ते
मैंने बाँध ली थी कलाई पर तेरी चूड़ियों की आवाज़
हर भूल में भी तेरा संगीत बचा रहा
तीसरा समुंदर था समय का, अनंत और शांत
जहाँ तैरते थे डायनासौर और भविष्य के पक्षी
मैंने देखा तुझे हर युग में अलग रूप में
पाषाण-युग की गुफा में, स्वर्ण-युग के महल में
चौथा समुंदर था स्वप्नों का, रंग-बिरंगा
जहाँ मछलियाँ गाती थीं और सीपियाँ बोलती थीं
तेरा चेहरा हर लहर पर उभरता डूबता
एक जल-चित्र जो बनता-मिटता रहता
पाँचवा समुंदर था प्रश्नों का, उथला पर घुमावदार
“क्यों खोजते हो?” “क्या पाओगे?” “कौन हो तुम?”
“तुम कौन हो?” “मैं कौन हूँ?” “हम क्या हैं एक दूसरे के लिए?”
हर प्रश्न एक द्वीप, हर उत्तर एक और प्रश्न
छठा समुंदर था प्रेम का, मीठा और खारा दोनों
जहाँ डूबना और तैरना एक ही बात थी
जहाँ मिलना और बिछड़ना एक ही संगीत था
मैं तैरा या डूबा, पता नहीं, बस तैरता-डूबता रहा
सातवाँ समुंदर था… तू स्वयं
एक शांत झील जिसमें तैरते थे सब छह समुंदर
तेरी आँखों में देखा मैंने अपना सफ़र
तेरी साँसों में सुना सब समुंदरों का गीत
मैंने पाया कि खोजना ही मंज़िल थी
और हर समुंदर तू ही थी अलग नाम से
मैं लौटूँ अपने घर? पर घर कहाँ है अब?
जब सातों समुंदर तेरे भीतर बहते हैं
अब हम निकलेंगे साथ नए समुंदरों की खोज में
जो बहते हैं हमारे भीतर के अंतरिक्ष में
सात समुंदर पार पहुँचकर भी जो शेष हैं
अनगिनत समुंदर प्रेम के, अनंत और अपरिचित