तूने जो ग़म दिए थे मंज़ूर हो गये
यूँ तेरे इश्क़ में हम मजबूर हो गये
इतने हुए तबाह के मशहूर हो गये
यूँ तेरे इश्क़ में हम मजबूर हो गये !
अंतरा :
लगता था जिनको जीकर, हम तुम क़रीब थे
लम्हे वो चाहतों के, कितने अजीब थे,
जाने वो क्या ख़ुशी थी, जिसकी तलाश थी
आँखों से बहती बारिश, कितनी उदास थी,
तेरे दर्द के सहारे है ज़िन्दगी
तुझसे जुदा तो हूँ पर रिहा नहीं
पलकों से ख़्वाब गिरते ही चूर हो गये
यूँ तेरे इश्क़ में हम, मजबूर हो गये
तूने जो ग़म दिये थे मंज़ूर हो गये
यूँ तेरे इश्क़ में हम मजबूर हो गये