हे शारदे माँ ! ये कैसी है प्रीत ?
तुमसे ही जीवन तुम्हीं से संगीत ॥
तूहीं मॉ हो सरगम, तूही वीणा वादिनी ।
तू ज्ञान सरिता,तू ही विद्या दायिनी ॥
तू ना रहे तो अधूरा ये गीत ।
हे शारदे माँ ! ये कैसी है प्रीत ?
तुमसे ही जीवन तुम्हीं से संगीत ॥
हे शारदे माँ !
किसी की भी क़िस्मत तू पल में बदलती ।
हमेशा तू सबकी मॉ जिव्हा पे रहती ॥
तू चाहे बदल जाए दुनिया की रीत ।
हे शारदे माँ ! ये कैसी है प्रीत ?
तुमसे ही जीवन तुम्हीं से संगीत ॥
हे शारदे माँ !
हे मॉ तू खोल दे ये मन की रे आँखें ।
तू चाहें तो दिन हो जाए सारी रातें ॥
तू चाहे तो पग-पग पे मिल जाये जीत ।
हे शारदे माँ ! ये कैसी है प्रीत ?
तुमसे ही जीवन तुम्हीं से संगीत ॥
हे शारदे माँ !