ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
हो निर्धन का हो राम
राम
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
हो दुर्बल का हो राम
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
1. तुम तो बादल मै मोरनी
तमारा ही माए
तुम तो बरसो तो मै बोलीया
अब म्हारा कईं हवाल
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
2. तुम तो समंदर मै मछली
रहांगा तमारा हो माए
तुम जद सूको तो मैं मरी जावां
अब म्हारा कईं हवाल
ऐसी म्हारी प्रीत निभावजो
3. कहे को कबीर धर्मदास से
पिऊ थारा घट मांए
कहे को कबीर धर्मदास से
पिऊ ह्रदय धड़काएँ