रूठे को मनाना, तुमको आता नहीं है ।
मोहब्बत जताना, तुमको आता नहीं है।
लफ्ज़ों को कैसे रखूं लबों पर तुम्हारे,
दस्तक दिल पर लगाना तुमको आता नहीं है।
तुम जाओ ! ज़रा अपनी मोहब्बत के ढंग संवार लो।
देखो रूठा है जो, उस पिया परदेसी को पुकार लो।
नदिया को मिलना हो सागर से,
बेहेना भी तो ज़रूरी है।
नैन लड़ाना ना काफी है,
कहना भी तो ज़रूरी है।
पिया रूठ ना जाए, सोचा करो,
पिया परदेसी को पुकार लो।
रैना बीती जाए देर न तुम करो,
पिया परदेसी को पुकार लो।
जज़्बातों को अल्फाज़ों में बयान तो करो।
इश्क़ किया कोई जुर्म नहीं, हया ना करो।
इज़हार-ए - खत लिख भी दो,
इकरार करें, इनकार नहीं।
पिया को मिलन की रहती आस
पिया परदेसी को पुकार लो।
तोरा आंगन ही आए है रास
पिया परदेसी को पुकार लो।