जय माता सरस्वती
गीतकार यादव राज
लगे बिया मेहर तबो देखेल ना मूड के
दोसरा लईकियन के देखेल घूर के २
भइल जात बाड़ असलील राजा जी
रातो दिन देखतार रील राजा जी
कवना सवतीन प गईल पिघिल राजा
हामार कइले बाड़ जियल मुश्किल राजा जी
कवना
अंतरा -
करेल कमेंट तू लिखेल वाह डियर
का सोचतार कर हमसे क्लियर
खुलके बताव सब कहानी ए पिया
कर जनि हमसे बेईमानी ए पिया
मिलताटे कवन तहरा फील राजा जी
रातो…
अंतरा-
छोड़ी घर के मीठा बहरी खातार मरचा
सुननी ह तहरा अफेयर के चर्चा
यादव राज अब बरदास ना करब
तहरे के मारब या ख़ुद ही मरब
ठोकतार छाती में कील राजा जी