मूखडा-
पहिले-पहिले जान गईलू ससूरारी कईसे चलाव ताटे पियवा हो गाडी-2
त बोल कईसे मिलवलस नयनवा ना
गंजवा पिके मजवा मारेला सजनवा ना-2
अन्त्रा-1-
बेरी -बेरी भाग-भाग घरवे में आवे,घरवा में आके हमके गरवा लगावे
लागे ना तोहरा बलमुआ के टोना,एतने निहोरा करीला ए सोना
बाकि दिल में बा हमरो चयनवा ना
गंजवा .......
अन्त्रा-2-
अउरी बताव अपना ससुरा के बात हो,संईया संघे कईसे कट तावे तोहार रात हो
बादल आ मिथुन हमके कुछउ ना जाने,सोनुआ देवरवा हमार बतियो ना माने
त बसे अंकित मे हमरो परनवा ना
गंजवा.......