जैसे की हो पेहली बारिश की खुशबू
ये हवा के झोंके मुझे बेहका रहे है
रब ने तुझे बनाया है क्या खूब
सारे फूलो के रंग तुझसे मेहका रहे है
तो किस बात की है हया
जब हया को ही ना आए शरम
तू प्यार कर ले जरा
आया है बारिश का मौसम
खुल कर करले मज़ा
भूल के पुराने गम
क्या ये हवा में है नशा
या फिर नशें में है हम
खुल कर करले मज़ा
भूल के पुराने गम
चल भरे ऊंची उड़ान छू ले पंछी आसमान
जहां से दुनिया गोल दिखती है
चल बनते है थोड़े नादान छोड़े बस्ती जहान
देखे दुनिया को हमसे कितनी हमदर्दी है
चलता रहे ये सिलसिला
सात जनम में भी ना हो खत्म
तू प्यार कर ले जरा
आया है बारिश का मौसम
खुल के करले मज़ा
भूल के पुराने गम
क्या ये हवा में है नशा
या फिर नशें में है हम
खुल के करले मज़ा
भूल के पुराने गम