सन्नाटा था मेरा दोस्त, और खामोशी थी मेरी ज़ुबान,
आज चीख़ रहा हूँ, पर तू सुन रहा है कहाँ?
तेरी आँखें पूछती रहीं, 'आखिर क्या है ग़म?'
और मैं पत्थर का था, बोला बस, 'हाँ, ठीक हूँ, हमदम।'
वो आख़िरी शाम, जब तूने इशारा किया था,
मैंने समझा नहीं, शायद किनारा लिया था।
वो सवाल हवा में तैरते रहे, अनसुलझे से,
मेरे डर के साये में, रिश्ते उलझे से।
आज गिटार की धुन में, वो पल गूँज रहे,
जब कह सकता था सब, पर लफ्ज़ रूठ रहे
कुछ कह न सका, मैं, तेरा हो न सका,
हाँ, मैंने खो दिया सब, अब रो रहा हूँ, क्या सज़ा!
कुछ कह न सका, मेरी हार की कहानी,
ये वहम था मेरा, कि तू ख़ुद सब जानेगी।
हर साँस लेती है तेरा नाम, ये अधूरा इश्क़,
अब इस दर्द के समंदर में, मैं हो गया हूँ ग़र्क़।
ईगो की ज़ंजीर, खुद मैंने डाली थी हाथों में,
सोचा, झुकूँगा नहीं, चाहे रातें कटें काँटों में।
पर अब एहसास होता, वो जीत नहीं, हार थी,
तू सामने खड़ी थी, पर दूरियों की दीवार थी।
मैंने दबाया हर जज़्बा, हर प्यार का इज़हार,
जैसे दिल में हो कोई राज, इक अंधेरा तहखाना।
तेरी हर बात पे, बस सिर हिलाना, मेरा जवाब,
शायद डर था मुझे, कहीं तू कर न दे इंकार।
उस पल, अगर एक लम्हा मैं सच बोलता,
आज ये पछतावा, यूँ दिल को न टटोलता।
काश! कोई बटन होता, जो टाइम को पीछे ले जाता,
बस वो एक बात बोलने, ये दिल दोबारा धड़कता।
अब दिखता है हर चेहरा, मुझे तेरी सूरत में,
मैं जी रहा हूँ कैद में, तेरी याद की मूरत में।
ये फासले नहीं हैं, ये मेरी बनाई सीमाएँ हैं,
तू दूर हुई क्यूँकि, मैंने तोड़ी सारी कसमें हैं
कुछ कह न सका, मैं, तेरा हो न सका,
हाँ, मैंने खो दिया सब, अब रो रहा हूँ, क्या सज़ा!
कुछ कह न सका, मेरी हार की कहानी,
ये वहम था मेरा, कि तू ख़ुद सब जानेगी।
हर साँस लेती है तेरा नाम, ये अधूरा इश्क़,
अब इस दर्द के समंदर में, मैं हो गया हूँ ग़र्क़।
आज कमरे की हर चीज़, मुझसे सवाल पूछती है,
ये तन्हाई तेरी कमी को, हर पल घूँट घूँट पीती है।
दोस्तों के बीच भी, मैं अजनबी सा रहता हूँ,
भीड़ में भी अकेला हूँ, ये झूठ क्यों सहता हूँ?
तेरा मैसेज पड़ा है, दो साल पुराना अब भी,
'तुमने जवाब नहीं दिया,' पढ़ के रोता हूँ जब भी।
ये आँसू नहीं, मेरे टूटे हुए वादे हैं,
मनीष के इस अधूरेपन के, ये दर्दनाक इरादे हैं।
मैं ज़िम्मेदार हूँ, हाँ! मेरी है ये ग़लती,
खामोशी ने मेरी, ये कश्ती है पलटी।
सुन ले तू, जहाँ भी है... इक बात जान ले...
ये रैप नहीं, मेरे दिल की आख़िरी पुकार है...
मैं... तुम्हें... बहुत... चाहता था...
(एक गहरी साँस)
...पर कुछ कह न सका...